कोंच जालौन- पुरातन काल से श्री कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री वलराम जी का जन्मोत्सव हलषष्ठी के रूप में महिलाओं द्वारा मनाया जाता है जिसमे मान्यता है कि इस ब्रत को रखने से पुत्रों की दीर्घायु होती है धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शेषनांग द्वापर युग मे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई वलराम के रूप में अवतरित हुए थे जिनका मुख्य शस्त्र हल व मूषल है इसी कारण वलराम जी को हलधर भी कहा जाता है इसी का नाम हलषष्ठी व्रत पड़ा जिसमें महिलाएं आज दिन व्रत रखते हुए अपने पुत्रों की लंबी उम्र की कामना करती है और गाय का दूध और जोता बखरा हुआ कोई भी अन्य नहीं खातीं हैं भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह पर्व मनाया जाता है जिसमें एक कथा इस प्रकार प्रचलित है कि प्राचीन काल मे एक ग्वालिन थी और उसका प्रसव काल अत्यंत निकट था लेकिन वह दूध दही वेचने गयी हुई थी लेकिन कुछ दूर पहुंचने पर ही ग्वालिन को प्रसव पीड़ा हुई और वह एक झरवेरी कि ओट में चली गयी और वहां पर एक बच्चे को जन्म दिया वह उस बच्चे को वही छोड़कर पास के गांव में दूध दही बेचने चली गयी संयोग से उस दिन हलषष्ठी थी गाय भैंस के मिस्रत दूध को केवल भैंस का दूध बताकर ग्वालिन ने सीधे साधे गांब वालों को बेच दिया उधर जिस झरवेरी के नीचे अपने बच्चे को छोड़ा था वही पास में एक किसान हल जोत रहा था अचानक से बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर मे घुसने से बालक की मृत्यु हो गयी जिसे देखकर किसान बहुत दुखी हुआ और उसने हिम्मत करके झरवेरी के कांटों से बच्चे के चिरे पेट मे टांकें लगाकर वहीं छोड़कर चला गया जब ग्वालिन दूध बेचकर बापिस आयी तो बच्चे की दशा देखकर उसे समझते देर नही लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है और वह सोचने लगी कि मैने झूठ बोलकर गाय का दूध देकर स्त्रियों का धर्मभ्रष्ट किया हुआ है और वह प्राश्चित के लिए बापिस गांव में गयी और अपनी करतूत को सभी स्त्रियों को बताया तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ रहम खाकर क्षमा करते हुए उसे अशीर्वाद दिया जब वह बापिस झरवेरी के पास पहुंची तो पुत्र को जीवित अवस्था मे देखकर आश्चर्य चकित रह गयी तब उसने कभी भी झूठ न बोलने का प्रण लिया इसी कथा की मान्यताओं पर महिलाओं ने दिन मंगलवार को भगवान की पूजा अर्चना कर हलषष्ठी का व्रत रखते हुए अपने पुत्रों के लिए दीर्घायु होने की कामना की यह भी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान हीन महिलाओं को भी संतान सुख की प्राप्ति होती है और आयु एवं आरोग्य में वृद्धि होती है इसी लिए नगर एवं क्षेत्र की महिलाओं ने अपने अपने घरों में पूजा अर्चना करते हुए बिधि विधान से हलषष्ठी का व्रत मनाया।